जो तब न समझता था आज जाने क्या -क्या समझ चुका हूँ। जो तब न समझता था आज जाने क्या -क्या समझ चुका हूँ।
उसकी कल्पना करना, कहानी को फिर से जोड़ना, वो मजा कहां है। उसकी कल्पना करना, कहानी को फिर से जोड़ना, वो मजा कहां है।
तालाब व कीचड़ वाली, जगहों पर यह उगता। तालाब व कीचड़ वाली, जगहों पर यह उगता।
बदलते समय में बदलता सफर रेलगाड़ी का..... बदलते समय में बदलता सफर रेलगाड़ी का.....
गुजरे हुए लम्हों की किताब होगी खास। गुजरे हुए लम्हों की किताब होगी खास।
जो छुूट रहा उस भीड़ में कहीं उस पल को गांव में आकर हमने कही जिया।। जो छुूट रहा उस भीड़ में कहीं उस पल को गांव में आकर हमने कही जिया।।